झारखंड में RSS नेता के सीने में मारी 6 गोलियाँ, गो तस्करी और अवैध खनन के खिलाफ चला रहे थे अभियान: पुलिस बोली- जमीन विवाद में हुई हत्या

शंकर डे और कार्रवाई करती पुलिसझारखंड के धनबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता 55 वर्षीय शंकर प्रसाद डे की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। टुंडी क्षेत्र में गो तस्करी को रोकने में शंकर प्रसाद डे की भूमिका निभा रहे थे। परिजनों ने हत्या के आपसी जमीन विवाद बताया और पड़ोसी के खिलाफ तहरीर दी है।

घटना धनबाद के पूर्वी टुंडी प्रखंड क्षेत्र के दुम्मा गाँव की है। यहाँ मंगलवार (11 जुलाई 2023) की देर रात शंकर डे की अज्ञात बदमाशों ने उनके सीने में 6 गोलियाँ मार दी। इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिवार के लोगों का कहना कि शूटर बुलाकर शंकर की हत्या कराई गई है।

शंकर संघ से जुड़े वनवासी कल्याण केंद्र के जिला संपर्क प्रमुख थे। इसके साथ ही वे ग्राम रक्षा दल के प्रखंड अध्यक्ष भी थे। लोगों का कहना है कि रोज की तरह शंकर मंगलवार की रात 11 बजे भी ग्राम रक्षा दल के चेकपोस्ट शहरपुरा पर ड्यूटी करने जा रहे थे। इसी बीच हाथसारा और दुम्मा गाँव के बीच एक तालाब के पास घात लगाकर बैठे हमलावरों ने गोलियाँ दाग दीं।

हत्या के बाद उनका शव रात भर वहीं पड़ा रहा। सुबह करीब पाँच बजे पंचायत के उप-मुखिया चिंतामणि डे वहाँ से गुजर रहे थे तो उन्होंने शव को दुम्मा कब्रिस्तान के पास देखा। कब्रिस्तान की दूरी शंकर डे के घर से लगभग 500 मीटर है। शव देखने से पता चल रहा कि गोलियाँ नजदीक से मारी गईं।

उधर, शंकर डे बेटे मधुसूदन डे ने आशंका जाहिर की है कि उनके पिता की हत्या जमीन विवाद में की गई है। इसको लेकर उन्होंने गाँव में ही रहने वाले चचेरे भाई मिहिर डे, उमेश डे और सुसेन डे समेत 11 लोगों के खिलाफ पूर्वी टुंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस उमेश व सुसेन को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

मधुसूदन के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से उसके पिता का उसके चचेरे भाइयों से विवाद चल रहा था। इसको लेकर पूर्वी दु्म्मा थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। इतना ही नहीं, जमीन विवाद का मामला सुलझाने के लिए 12 जुलाई को पंचायती भी होने वाली थी। इसी बीच यह घटना हो गई।

आरएसएस जिला सह सेवा प्रमुख राम प्रताप कुंभकार ने इस हत्या को षड़यंत्र बताते हुए अपराधियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की माँग की है। पूर्वी टुंडी ब्लॉक माओवादियों का इलाका है। शंकर प्रसाद इलाके गौ तस्करी ही नहीं, बल्कि रेत खनन के खिलाफ भी थे।